पुरुष शत्रु नहीं मित्र हैं!

नारी की कहानी एक प्रयत्न ताकि एक मनुष्य (पुरुष) और दूसरे मनुष्य (महिला) में मन, कर्म, वचन का कोई भेद न रहे. ताकि हर संकीर्ण सोच पर पार पाकर सच्चा समाज स्थापित हो सके, और वर्षों से नारी पर डाली गयी धर्म, रिवाजों और समाज के बेडियाँ तोड़ कर बराबरी का हक़ मिले... प्रयत्न आपकी सहभागिता के बिना अधुरा है.. आपके सहयोग की लालसा में..

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Tuesday, September 29, 2009

श्रीराम का पुतला कब जलेगा!


नवमी की रामलीला खत्म हो गई। अगले दिन रावण का पुतला भी जल गया। महफिल में मौजूद किसी मासूम बच्चे ने अपने बाबा से पूछा- दादा अब क्या होगा। दादा बोले, `अब क्या! भगवान राम दीवाली पर अयोध्या लौट कर रामराज्य चलायेंगे। हम्म्म! मेरा मन हमेशा की तरह स्तब्ध रह गया। तो वह था रामराज्य! फिर तौ तौबा है। कब तक हम उस सच को नजरअंदाज करते रहेंगे जो रावण की मौत के बाद घटित हुआ था।

.......वानरसेना रावण की मौत का जश्न मना रही थी। विभीषण के राजतिलक की तैयारियां चल रही थी। अशोक वाटिका में विरह जीवन में तडप रही सीता का निर्वासन खत्म हो गया। राम और सीता के मिलन का प्रेममय समय आ गया। होना तो यह चाहिए था कि देव, यक्ष, गंधर्व और भगवान इन लम्हों का दीदार करने के लिए इंतजार करते और फूलों की बारिश करते। लेकिन यह क्या! यहां तो विराना छा गया। प्रियवर से मिलने के लिए आ रही सीता को मर्यादा पुरूषोत्तम ने अचानक रोक दिया। लक्ष्मण से कहा कि आग जलाओ। सीता को अग्नि परीक्षा देनी होगी। वह परपुरूष के सानिध्य में रहकर आई है। .....अग्नि परीक्षा! लक्ष्मण का स्वर तक कांपने लगा। हर शख्स सन्न रह गया। लेकिन लक्ष्मण से बडा भाई का भक्त तो दूसरा कोई हुआ ही नहीं। वैसे भी स्त्री के दर्द को लक्ष्मण कब समझ सके थे। वरना भाईप्रेम कर महान मिशाल पेश कर वनवास धारण करने वाले लक्ष्मण अपनी धर्मपत्नी को वियोग में अकेला छोड करने नहीं आते। यह भी त्रासदी ही है कि राम और सीता के वियोग को तो सब की सहानुभूमि मिली लेकिन अयोध्या के राजमहल में आसूं भी बहाने में अक्षम लक्ष्मण की जीवनसंगिनी के दुख का हाल किसी ने नहीं पूछा।

और सीता.... उसको भी कब किसने पूछा था। इस बार भी उसकी हालत का जायजा लेने वाला कोई भी नहीं था। खैर आग जली। सीता जलती लपटी के बीच से गुजर कर आई। लेकिन जली नहीं। उनकी शान में आंच भी नहीं आ सकी। शायद आग भी स्त्री होती है तभी सीता का दर्द समझ पाई होगी। फिर हुआ मिलन। लेकिन अब तो सब बेमतलब था। बहरहाल, औरत को हक ही नहीं होता कि अपना कचोट, अपना अपमान, अपना दर्द याद करने का। खासकर जब दोषी कोई और नहीं बल्कि उसका पति हो। प्रभु की टोली अयोध्या पहुंची। जोरदार स्वागत हुआ। श्रीराम का राजतिलक हुआ और आया रामराज्य! रामराज्य का अर्थ?

अयोध्या बहुत अच्छी नगरी है। सत्ता में रहने वाले लोग इस जगह का विशेष ख्याल रखते हैं। आज भी आप जायें वहां तो छावनी से भी ज्यादा जवान नजर आयेंगे। तब भी हालात जुदा न थे। श्रीराम तो थे ही प्रजा के सच्चे रखवाले। उन दिनों सीता गर्भवती थी। राम बहुत खुश थे। इसी दौर में एक बार संध्या समय नगरी के गुप्त भ्रमण को निकल गए प्रभु। सरयु नदी के तट पर जहां एक ओर दशरथपुत्र का राजमहल था तो दूसरी ओर विशाल नगर। राम चले जा रहे थे। रास्ते में एक गरीब धोबी की कुटिया थी। धोबी अपनी पत्नी को घर से बाहर निकाल रहा था। कह रहा था अरे मैं कोई राम नहीं हूं जिसकी पत्नी को कोई उठा कर ले गया और उसने फिर उसको घर में रख लिया। राजा राम सन्न रह गये। उन्होंने उसी क्षण न्याय किया। ना ना... धोबी को दंड नहीं दिया बल्कि पत्नीव्रत राम ने सीता को तुरन्त घर से निकालने का फैसला किया। पल भर के लिए सोचिए! राम और धोबी में कौन श्रेष्ठ था! मेरी बुद्धि अल्पविकसित है लेकिन मैं इतना जानता हूं कि दोनों ने अपनी पित्नयों को घर से निकाल दिया लेकिन धोबी ने अपनी पत्नी की अग्नि परीक्षा नहीं ली। खैर, राजा जनक की बेटी गर्भवती बेटी सीता एक बार फिर जंगलों में ठोकरें खाने के लिए छोड दी गई। जय श्री राम!

कुछ दिन बाद राजा राम ने अश्वमेद्य यज्ञ कराने का फैसला किया। लेकिन एक अडचन आ गई। इस यज्ञ में पत्नी कर साथ होना आवश्यक था। राम यहां भी एक मिशाल पेश कर गये। उन्होंने सीता को नहीं खोजा। खोजते भी कैसे। श्रीराम ने सीता की सोने की प्रतिमा बनवाई उसे यज्ञ मंडप में बिठाया। प्रभु भक्तों को रास्ता बता गये और स्त्री को औकात।

हां, सीता का क्या हुआ। इससे पहले की अयोध्या की राजशाही फिर उनका अपमान करती सीता इतिहास बन गई। अतं में सीता को शरण देने वाला कोई पुरूष नहीं था। धरती फटी और सीता उसी में समा गई। मैं आस्तिक हूं। लेकिन मेरा मन पूछता है कि राम का पुतला कब जलेगा। मां सीता मुझे क्षमा कर देना।

Wednesday, September 2, 2009

फिर चकनाचूर हुआ पुरुष वर्चस्व!


दुनिया के सबसे जांबाज लड़ाकू विमान 'सुखोई-30 एमकेआई' की कॉकपिट पर अब तक के पुरूष वर्चस्व को चकनाचूर करते हुए एक भारतीय युवती ने इसमें उड़ान भर इतिहास रच दिया है।
भारतीय युवती सुमन शर्मा ने रूस में हाल ही में सम्पन्न हवाई कार्यक्रम में भारत के लिए यह गौरव अर्जित किया और सुखोई लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाली वह विश्व की प्रथम महिला बन गई।
सुखोई विमान भारतीय वायु सेना में 12 साल से है और रूस की वायु सेना का भी यह अग्रिम पंक्ति का विमान है लेकिन यह पहला मौका था जब कोई महिला इसकी कॉकपिट में बैठी।
सुमन शर्मा वही युवती हैं जिन्होंने इस साल के 'एयरो इंडिया' में अमेरिकी लड़ाकू विमान 'एफ-16' और रूसी विमान 'मिग-35' में उड़ान भरी थी लेकिन 'सुखोई-30 एमकेआई' असैनिकों की उड़ान के लिए अभी तक उसका सपना ही बना हुआ था। दुनियाभर के पायलट सुखोई में उड़ान भरने की हसरत रखते हैं लेकिन भारत की एक साधारण युवती को सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने कीर्तिमान बनाने का अवसर दिया।
सुमन की यह उड़ान मॉस्को से करीब 40 किलोमीटर जुकोव्स्की से हुई और सुखोई डिजाइन ब्यूरो के टेस्ट पायलट यूरी वास्चुक ने इस भारतीय युवती का सपना साकार किया। इतिहास रचने से उत्साहित सुमन शर्मा ने जोश के साथ बताया कि सुखोई में वह 12 हजार फुट की ऊंचाई तक गई और एक समय था जब उनके शरीर पर गुरूत्वाकर्षण का पांच गुना दबाव था। यानी आंकडों की भाषा में उस समय इस युवती का वजन 230 किलो से ऊपर चला गया था।
सुखोई की इस यादगार उड़ान के सबसे रोमांचक क्षण की याद करते हुए उन्होंने बताया कि उड़ान के समय एक बार ऐसा लगा कि विमान रूका हुआ है। मैंने पायलट यूरी से पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्होंने विमान पर ब्रेक लगा दिए हैं। उस समय ऐसा लग रहा था कि सुखोई हवा में ठहरा हुआ है। उड़ान के समय बाहर का वातावरण बहुत खराब था और सुमन के अनुसार आकाश में धुंध की सफेद चादर फैली हुई थी।
विमान एक समय 700 मील प्रति घंटे की रफ्तार पर था यानी वह ध्वनि की गति को पीछे छोड़ चुका था। यूरी ने अचानक सूचित किया कि अब वे जोन चार में प्रवेश कर रहे हैं। यह सुखोई के हवा में कुलांचे लगाने का क्षण था। विमान ने 360 डिग्री का पूरा टर्न लिया और मैंने चारों देखा तो लगा कि कांच के कवच में ऐसे हिलडुल रही हूं जैसे बच्चा मां के गर्भ में सिकुड़ा हुआ होता है।
भारतीय महिला की सुखोई में यह उड़ान ऐसे समय हुई है जब दुनिया की छह दिग्गज कम्पनियां भारतीय वायु सेना के लिए होने वाले 126 लड़ाकू विमानों के सौदे को हासिल करने के जी-तोड़ प्रयास कर रही हैं। इन देशों में रूस अपना मिग-35 विमान उतार रहा है।
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