पुरुष शत्रु नहीं मित्र हैं!

नारी की कहानी एक प्रयत्न ताकि एक मनुष्य (पुरुष) और दूसरे मनुष्य (महिला) में मन, कर्म, वचन का कोई भेद न रहे. ताकि हर संकीर्ण सोच पर पार पाकर सच्चा समाज स्थापित हो सके, और वर्षों से नारी पर डाली गयी धर्म, रिवाजों और समाज के बेडियाँ तोड़ कर बराबरी का हक़ मिले... प्रयत्न आपकी सहभागिता के बिना अधुरा है.. आपके सहयोग की लालसा में..

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Friday, January 30, 2009

भारत को ओबामा की नहीं श्रीराम सेना की जरुरत है!

हाँ, सोलह आने सच बात है.. वो लड़की पब जाती है... मैंने खुद देखा उसे.. फिर तो सिगरेट भी पीती होगी और शराब भी... हे राम!! मेरे देश को किसकी नज़र लग गयी... आखिर जो नियम सदियों से चले आ रहे हैं वो गलत कैसे हो सकते हैं... अब देखो न सिर्फ भाजपा वाले कहते तो सा,अझ भी आता की बात एकतरफा है.. लेकिन अब तो कांग्रेस वाले भी बोल रहे हैं.. पब कल्चर हमारा है ही नहीं... विदेशी है.. और फिर लड़कियों की भी कुछ मर्यादा होती है....
नहीं यह सब मैं नहीं बल्कि इस देश के 'समझदार' लोग कह रहे हैं.. अब बहस यह है की लड़कियां किस हद तक जा सकती हैं... हर अख़बार यही कह रहा है.. हर चैनेल भी..
संस्कृति के यह तथाकथित पहरेदार लड़कयों को पीटना बहादुरी समझते हैं... यह लोग शायद नहीं जानते की यह सातवीं सदी नहीं बल्कि 21वीं सदी है... लड़की यह न करे वो न करे... सब अपनी मर्जी चलाना चाहते हैं..

फिर हम कहते हैं की मेरा भारत महान.. कुछ महान नहीं.. सब बकवास है.. हम बराक ओबामा की बात करते हैं.. लेकिन यह नहीं देखते की वो लोग कैसे कंधे से कन्धा मिलाकर चलते हैं.. वहां तो ऐसा नहीं होता... लेकिन यह हमारी संस्कृति नहीं है भाई...
हमारी संस्कृति तो है कि औरतो को घर के अंदर रखो... जैसे वो पालतू जानवर हों.. सॉरी, गलती हो गयी... पालतू जानवर भी तो मनमर्जी से घूमते हैं.. औरत तो औरत होती है.. सबसे नीचे.. जरा सोचो अगर वो पब में जायेगी तो घर कि इज्ज़त खराब होगी... कुछ काम लड़कों के लिए होते हैं...

वाह जी वाह!!! जय श्री राम.. पब में मत जाना.. कोई नहीं बचायेगा... सुनो कुछ दिनों में एक और फरमान आने वाला है.. नोकरी भी मत करना.. क्या मर्द मर गये हैं.. पढ़ लिखा कर क्या करोगे.. घर का काम काज सीखो.. आजकल नोकर भी नहीं मिलते.. औरत का धरम पति कि सेवा ही है..

समझे... भारत को बराक ओबामा कि नहीं श्री राम सेना कि जरुरत है...

Sunday, January 25, 2009

अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो......

आज फिर बालिका दिवस है। मतलब आज फिर लोग चिल्लायेंगे.. नारे लगेंगे और टीवी पर फोटो खींचेंगे. हाँ ब्लॉग भी खूब चमकेंगे... लेकिन....

बहुत दिन नहीं हुए... शायद १५ दिन.. मैं अपने दोस्त के घर में था . तभी एक फ़ोन आया.. मेरे दोस्त के पिताजी को. उनके किसी साथी को यहाँ बच्चे का जन्म हुआ था...
क्या हुआ लड़का..? उन्होंने पूछा..
स्पीकर बंद था.. दूसरी तरफ की आवाज़ मैं न सुन सका..
अंकल के चेहरे से ख़ुशी गायब हो गयी.. वो जोर से बोले ...क्या करते हो गुप्ता जी फिर लड़की ....मेरी आँखों के आगे अँधेरा छा गया... स्पीकर अभी भी बंद था..लेकिन दूसरी तरफ से आवाज सुनाई दी... ऐसा नहीं होता अंकल जी... लड़कियां बहुत अच्छी होती हैं.. मुझे लड़की ही चाहिए थी.

टीवी पर चर्चा हो रही थी. एक लड़की का बलात्कार हो गया था. एक महोदय बोले लड़कियों को कम फैशन करना चाहिए... लेकिन क्यों.....
कई प्रश्न उठते हैं.. सबसे पहला कि क्या कम फैशन करने से ऐसे अपराध नहीं होंगे? इससे भी खतरनाक प्रश्न यह है कि ऐसे अपराध करने वाले लोग भेड़िये हैं... जो लड़कियों को देखते ही आप खो देते हैं.. अगर सचमुच ऐसा है तो पर्दा करने की जरूरत किसे है?.. ऐसे संदिग्ध लोगों की आखों पर पट्टियाँ बांध देनी चाहिए.. पर्दे की जरूरत उन लोगों को है न की मासूम लड़कियों को..
दूसरी बात क्या सचमुच फैशन ही जिम्मेदार है ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए? तो क्या कारण है की दूध पीती बच्चियों के बलात्कार हो जाते हैं? क्यों मानसिक रूप से विक्षिप्त लड़कियों पर कहर टूटता है..
यह कैसी सोच है कि फैशन पर रोक लगा दो... रोक तो उन लोगों पर लगनी चाहिए जो ऐसे भयानक बयान देते हैं.. सोच बदलनी होगी ऐसी लोगों की.. अगर नहीं तो ऐसी सोच रखने वालों को ही बदल देना होगा..

मैं लड़का हूँ.... बिटिया की पीड़ा का अनुभव नही कर सकता.... लेकिन इतना जरूर चाहता हूँ भगवान् से... अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो......
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