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Wednesday, September 2, 2009

फिर चकनाचूर हुआ पुरुष वर्चस्व!


दुनिया के सबसे जांबाज लड़ाकू विमान 'सुखोई-30 एमकेआई' की कॉकपिट पर अब तक के पुरूष वर्चस्व को चकनाचूर करते हुए एक भारतीय युवती ने इसमें उड़ान भर इतिहास रच दिया है।
भारतीय युवती सुमन शर्मा ने रूस में हाल ही में सम्पन्न हवाई कार्यक्रम में भारत के लिए यह गौरव अर्जित किया और सुखोई लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाली वह विश्व की प्रथम महिला बन गई।
सुखोई विमान भारतीय वायु सेना में 12 साल से है और रूस की वायु सेना का भी यह अग्रिम पंक्ति का विमान है लेकिन यह पहला मौका था जब कोई महिला इसकी कॉकपिट में बैठी।
सुमन शर्मा वही युवती हैं जिन्होंने इस साल के 'एयरो इंडिया' में अमेरिकी लड़ाकू विमान 'एफ-16' और रूसी विमान 'मिग-35' में उड़ान भरी थी लेकिन 'सुखोई-30 एमकेआई' असैनिकों की उड़ान के लिए अभी तक उसका सपना ही बना हुआ था। दुनियाभर के पायलट सुखोई में उड़ान भरने की हसरत रखते हैं लेकिन भारत की एक साधारण युवती को सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने कीर्तिमान बनाने का अवसर दिया।
सुमन की यह उड़ान मॉस्को से करीब 40 किलोमीटर जुकोव्स्की से हुई और सुखोई डिजाइन ब्यूरो के टेस्ट पायलट यूरी वास्चुक ने इस भारतीय युवती का सपना साकार किया। इतिहास रचने से उत्साहित सुमन शर्मा ने जोश के साथ बताया कि सुखोई में वह 12 हजार फुट की ऊंचाई तक गई और एक समय था जब उनके शरीर पर गुरूत्वाकर्षण का पांच गुना दबाव था। यानी आंकडों की भाषा में उस समय इस युवती का वजन 230 किलो से ऊपर चला गया था।
सुखोई की इस यादगार उड़ान के सबसे रोमांचक क्षण की याद करते हुए उन्होंने बताया कि उड़ान के समय एक बार ऐसा लगा कि विमान रूका हुआ है। मैंने पायलट यूरी से पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्होंने विमान पर ब्रेक लगा दिए हैं। उस समय ऐसा लग रहा था कि सुखोई हवा में ठहरा हुआ है। उड़ान के समय बाहर का वातावरण बहुत खराब था और सुमन के अनुसार आकाश में धुंध की सफेद चादर फैली हुई थी।
विमान एक समय 700 मील प्रति घंटे की रफ्तार पर था यानी वह ध्वनि की गति को पीछे छोड़ चुका था। यूरी ने अचानक सूचित किया कि अब वे जोन चार में प्रवेश कर रहे हैं। यह सुखोई के हवा में कुलांचे लगाने का क्षण था। विमान ने 360 डिग्री का पूरा टर्न लिया और मैंने चारों देखा तो लगा कि कांच के कवच में ऐसे हिलडुल रही हूं जैसे बच्चा मां के गर्भ में सिकुड़ा हुआ होता है।
भारतीय महिला की सुखोई में यह उड़ान ऐसे समय हुई है जब दुनिया की छह दिग्गज कम्पनियां भारतीय वायु सेना के लिए होने वाले 126 लड़ाकू विमानों के सौदे को हासिल करने के जी-तोड़ प्रयास कर रही हैं। इन देशों में रूस अपना मिग-35 विमान उतार रहा है।

2 comments:

Nirmla Kapila said...

सुनील जी पहली बार आपका बलाग देखा बहुत पसMdं आआय़ा आपका ये प्रयास अगर हर पुरुश ये प्रयास करे तो शायद दोनो के बीच का फासला सदा के लिये समाप्त हो जाये। और इस जाँबाज लडकी को सलाम बधाई

Harkirat Haqeer said...

मैं तो हैरान हूँ आपकी लेखनी पर ...इतनी कम उमर में ये इतना गहरा लेखन ....?

नमन है आपको ....!!

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