पुरुष शत्रु नहीं मित्र हैं!

नारी की कहानी एक प्रयत्न ताकि एक मनुष्य (पुरुष) और दूसरे मनुष्य (महिला) में मन, कर्म, वचन का कोई भेद न रहे. ताकि हर संकीर्ण सोच पर पार पाकर सच्चा समाज स्थापित हो सके, और वर्षों से नारी पर डाली गयी धर्म, रिवाजों और समाज के बेडियाँ तोड़ कर बराबरी का हक़ मिले... प्रयत्न आपकी सहभागिता के बिना अधुरा है.. आपके सहयोग की लालसा में..

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Thursday, July 23, 2009

बधाई हो! ...पति की अर्थी के साथ उठी 'उसकी' डोली

अब देखिये न, भारत ने कितनी तरक्की कर ली है. एक जमाना था जब विधवा का पुनर्विवाह महापाप समझा जाता था. लेकिन भला हो नारी सशक्तिकरण का ...जिसकी बदौलत पति की अर्थी उठने से पहले ही पत्नी की दूसरी शादी करा दीगयी. हमारे बुजुर्ग कितना ख्याल रखते हैं महिलायों का.

यह वाकया है हरियाणा का। जी हाँ, यह जींद इलाके का वही मामला है जिसमें पंचायत के तालिबानी फैसले पर अपने ही गौत्र में शादी करने पर युवक की पुलिस के सामने ही बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी। हरियाणा में समाज की मर्जी के खिलाफ अपने ही गोत्र की एक लड़की से विवाह करने के कारण 21 वर्षीय एक युवक की उसकी पत्नी के गांव वालों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।
त्रासदी यह है की साडी दुनिया ने और मीडिया ने इस दर्दनाक घटना पर तो दुःख जाहिर किया लेकिन किसी ने सोचने की जहमत नही उठाई की उस लड़की का क्या होगा। पर लोग सोचें भी क्यों.... आख़िर हर कदम पर नारी को दबाया जाता रहा है तो अगर वो फ़िर आफत बनी तो कौन सी आफत आ गयी?

उक्त युवक रवींद्र अपनी पत्नी सोनिया को विदा कराने बुधवार को इस गांव में पहुंचा था और तभी उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। गांव वालों ने रवींद्र के शव को बुधवार देर रात तक किसी को भी ले जाने नहीं दिया और उसे वहीं गांव के चौराहे पर रख दिया था। यह गांव जाट बहुल है।
रवींद्र ने इसी वर्ष मार्च में सोनिया (18) से विवाह किया था। उनकी शादी का सोनिया के घर वालों और ग्रामीणों ने यह कहते हुए विरोध किया कि दोनों समान गोत्र के हैं और ऐसे वे भाई-बहन होंगे।
गौरतलब है कि हरियाणा में गोत्र और परिवार के कथित सम्मान के नाम पर इस तरह की हत्याएं पहली भी होती रही हैं।
गाँव वालों का भयानक रूप यहीं ख़त्म नही हुआ बल्कि उन्होंने उस युवक की हत्या के बाद इस बेचारी लड़की की भी दूसरी शादी करा दी गयी। मेरा मसला यही है।

हरियाणा को विकास में अव्वल राज्यों में शुमार किया जाता है। लेकिन इस मुद्दे को राजनेता नही उठाएंगे क्योंकि इसमें वोट बैंक का फायदा नही है बल्कि घटा ही है। युवक को तो मार ही दिया लेकिन जरा उस लड़की के बारे में सोचिये। वो तो कहीं की न रही। न तो उसके घरवाले उसके साथ रहे और न ही उसका प्रेम। उससे न कुछ पूछा गया और न किसी ने उसकी राइ जानने की कोशिस तक की। उसे जिंदा छोड़ दिया गया और उसकी दूसरी शादी करा दी गयी। अब उसे या तो उम्र भर भरी बोझ तले जिंदगी बितानी होगी...... या फ़िर!! हाँ, अगर आप सोच रहे होंगे की वह लड़की आत्महत्या कर लेगी तो भी भूल जाइये। हरियाणा जैसे विकसित राज्य में आज भी ऐसा तबका है जहाँ लड़कियों की कुछ औकात नही समझी जाती... यह मेरे देश का दुर्भाग्य है...

3 comments:

संगीता पुरी said...

कैसे कैसे लोगों से समाज भरी पडी है !!

गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी said...
This post has been removed by the author.
गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी said...

किस एंगल से इस राज्य को विकसित राज्य का दर्जा मिला हुआ है????????
किसी की भावनाओं की कोई कद्र ही नहीं???
नफ़रत है ऐसे समाज और ऐसे जांति-पांति के बंधन से.....कलंकित किया राज्य को इन समाज के ठैकेदारों ने

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