पुरुष शत्रु नहीं मित्र हैं!

नारी की कहानी एक प्रयत्न ताकि एक मनुष्य (पुरुष) और दूसरे मनुष्य (महिला) में मन, कर्म, वचन का कोई भेद न रहे. ताकि हर संकीर्ण सोच पर पार पाकर सच्चा समाज स्थापित हो सके, और वर्षों से नारी पर डाली गयी धर्म, रिवाजों और समाज के बेडियाँ तोड़ कर बराबरी का हक़ मिले... प्रयत्न आपकी सहभागिता के बिना अधुरा है.. आपके सहयोग की लालसा में..

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Wednesday, August 20, 2008

हे भगवान! तुम पर लानत है...

प्रभु श्रीराम: सीता!मैंने तुम्हारे लिए युद्ध नहीं किया मैंने तो अपने कुल के मान के लिए रावण का बध किया है. तुम पर रावण बुरी दृष्टि डाल चुका है. अब तुम मेरे लिए भोग्य नहीं हो. तुम उस घी के समान हो जिसे कुते ने चाट लिया है.

उपरोक्त कथन भगवान राम के हैं जिन्हें मर्यादा पुरषोतम कहा जाता है. हिन्दू धरम मैं ही क्यों लगभग हर धर्म में नारी को वस्तु समझा गया और उसे भोगने के आलावा कभी भी किसी काबिल नहीं समझा गया. ऐसे तुच्छ धर्मों को मानने का क्या लाभ. दरअसल भगवान के नाम पर मानुषों ने ही नारी को पांव की जूती बना कर रखा था. और जब नारी समानता की और बड रही है तो धर्म को आड़ बना लिया जाता है. एक उदाहरण कुरान हदीस का है:

औरत को जब भी उसका शोहर सम्भोग के लिए बुलाये तो उसे तत्काल हाज़िर हो जाना चाहिए. जो औरत बिस्तर पर अपने पति को संतुष्ट नहीं कर पति उसे पति पीट भी सकता है.
मैं यह इसलिए नहीं दे रहा हूँ की आप किसी धर्म से नफरत करें बल्कि इसलिए लिख.रहा हूँ ताकि पाठक महिलाएं सच्चाई समझ स्केन और स्वाबलंबी हो सकें.. लेकिन अक्सर क्या होता है कि मुस्लिम महिलएं हिन्दू धर्म ग्रंथों की बात सुन कर हिन्दू महिलायों को बेचारा कह देती है और कमोबेश यही होता है जब हिदू महिलाओं को मुस्लिम मजहबी किताबों के बारे में पता चलता है..

अब यह महिलायों पर निर्भर है की वो इसे नियति समझें या पक्षपात. हालाँकि बर्षों से दबे नारी समाज का अचानक उठाना सभव नहीं परन्तु जोर लगाया जा सकता है.. हम भी साथ हैं

3 comments:

Anil said...

shoking!!!!!!!!!!!

Anonymous said...

कुछ भी कहिये, यही नियति है...

आँचल said...

भगवान को भी कटघरे में खडा कर दिया आपने......

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