मेरे एक सहयोगी अख़बार पढ़ रहे थे. अख़बार का पेज पलटते ही एक खबर पर नज़र गयी. पुरुष नसबन्धी से अभी भी डरते हैं लोग. मेरे सहयोगी ने कहा, मर्द जात पर कलंक हैं ऐसे लोग.. जो नसबन्धी करवा लेते हैं..
बहुत साल पहले जब मैं बहुत छोटा था.. शायद सातवीं मैं पड़ता था.. हमारे पडौस में एक व्यक्ति ने नसबन्धी करवाई थी. उस के अगले दिन वो काम पर नही गया. हालाँकि में बहुत छोटा था लेकिन मैंने पाया कि हर कोई उसकी आलोचना कर रहा था, हर कोई कह रहा था कि देखो उसकी औरत कितनी मोटी है लेकिन उसने अपना 'आपरेशन' करवा लिया.. अब पता चलेगा जब बीमार पड़ेगा पहले ही उसकी हालत ठीक नहीं है.. औरतों को इतना चडाना ठीक नहीं. ऐसा कहने वालों में अधिकतर महिलाएं ही थी.हालाँकि तब में 'आपरेशन' का मतलब नहीं जानता था लेकिन अब अच्छी तरह से जानता हूँ.. इतने सालों बाद भी पढे लिखे लोगों कि मानसिकता में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ..
एक डाक्टर मित्र से बात करने पर मैंने जाना कि महिलाओं को'आपरेशन' के बाद कई बीमारियाँ घेर लेती हैं साथ ही उन्हें तकलीफदेह आपरेशन का सामना भी करना पड़ता है. जबकि पुरुषों के साथ ऐसा नहीं है उनके साथ ऐसा नहीं होता. उनका आपरेशन जल्दी और बिना तकलीफ के हो जाता है..जबकि महिलाओं को लम्बे समय तक इसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं..
महिलाओं को बराबरी तो घर से ही देनी होगी न... हर काम को साझा कर के.. सुख-दुःख दोनों को साथ ही निभाने होंगे..
पुरुष शत्रु नहीं मित्र हैं!
नारी की कहानी एक प्रयत्न ताकि एक मनुष्य (पुरुष) और दूसरे मनुष्य (महिला) में मन, कर्म, वचन का कोई भेद न रहे. ताकि हर संकीर्ण सोच पर पार पाकर सच्चा समाज स्थापित हो सके, और वर्षों से नारी पर डाली गयी धर्म, रिवाजों और समाज के बेडियाँ तोड़ कर बराबरी का हक़ मिले... प्रयत्न आपकी सहभागिता के बिना अधुरा है.. आपके सहयोग की लालसा में..
Friday, July 11, 2008
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4 comments:
आपके विचार जानकर खुशी हुई। काश, अधिकतर पुरुष अपने परिवार की खुशहाली के लिए इतना थोड़ा सा कष्ट सहने की हिम्मत रखते। परन्तु बलवान पुरुष इस मामले में भी अबला से ही आशा करता है कि वह अधिक सा कष्ट सहकर उसे जरा से कष्ट से बचा ले।
घुघूती बासूती
कष्ट सहने की बात नहीं है पर लोगों को यह डर सताता है की नसबंदी से पुंसत्व पर कोई असर न पड़े. औरतों को इस तरह का कोई डर नहीं है. ख़ुद महिलाएं नहीं चाहतीं की उनके पति की मर्दानगी को खतरा हो. भले ही नसबंदी से कमजोरी एक मिथ्या धारणा हो पर पुरूष डरते हैं तो इसका यही कारण है.
भाई क्या कहने आप के अब क्या लिखे??
डोगरा जी,जब आपकी शादी और बच्चे हो जाएँगे और नसबंदी की बारी एगी तब आपकी हिम्मत देखेंगे,आप तौ डरेंगे ही,आपकी बीबी भी आपको नसबंदी नहीं करवाने देंगी,अगर आपको कुत्च हो गया तौ उसका क्या होगा. ये दुनिया बरी सीधी है हर कोई अपना हित देखता है.आप भी अपना हित देखो.मैंने तौ औरतों को बचपन में नसबंदी का कई स्टिच वाला बार ओपेराशn
करवाते देखा है,अब तौ मात्र दो स्टिच में ही काम हो जाता है.sobubisht@rediffmail.com
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