पुरुष शत्रु नहीं मित्र हैं!

नारी की कहानी एक प्रयत्न ताकि एक मनुष्य (पुरुष) और दूसरे मनुष्य (महिला) में मन, कर्म, वचन का कोई भेद न रहे. ताकि हर संकीर्ण सोच पर पार पाकर सच्चा समाज स्थापित हो सके, और वर्षों से नारी पर डाली गयी धर्म, रिवाजों और समाज के बेडियाँ तोड़ कर बराबरी का हक़ मिले... प्रयत्न आपकी सहभागिता के बिना अधुरा है.. आपके सहयोग की लालसा में..

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Sunday, June 22, 2008

....एक लड़के ने अचानक अपने हाथ से उसका स्तन मसल दिया. मैं स्तब्ध रह गया..

कुछ समय पहले की बात है. मैं पार्क में आराम फरमा रहा था. सामने कुछ दूरी पर एक लड़की टहल रही थी. शाम का वक्त था फिर भी पार्क लगभग खाली था. कारण शायद मानसून होगा. उस समय भी आसमान में बदल थे. रह रह कर बूंदाबांदी हो रही थी. में एक तक उस लड़की के हुस्न को निहार रहा था. हालाँकि वो अपने में मस्त थी. उसे मेरे होने का अंदाजा भी शायद नहीं था. इतने में युवकों का एक दल उसके पास से गुजरा. शायद तीन थे. आवारा टाइप. जैसे ही टोली लड़की के पास पहुंची. एक लड़के ने अचानक अपने हाथ से उसका स्तन मसल दिया. मैं स्तब्ध रह गया..

पलक झपकते ही युवकों की टोली गायब हो गयी. लड़की के चेहरे का सारा नूर उड़ गया. हालाँकि मैं दूर था लेकिन उसके माथे का पसीना और आँखों के आंसू मुझे साफ़ दिखाई दे रहे थे. मोसम ठंडा था. लड़की उसी समय वहन से चली गयी.

मैं अपराध बोध से घिर रहा हूँ. यह कैसा समाज है. और ऐसा भी नहीं है की यह घटना अप्रत्याशित हो... लड़की होना क्या गुनाह है. और ऐसी घटनाओं का जवाब क्या हो. मैं नही जानता.. आपको पता हो तो जरूर बताएं....

24 comments:

Neeraj Rohilla said...

सुनील जी,
बड़े अफ़सोस की बात है की सरेआम पार्क और पब्लिक प्लेसेज पर ऐसी घटनाएं हो जाती हैं | लडकी उस घटना के बाद लड़कों के बारे में क्या राय कायम करे | अभी कुछ दिन पहले मसिजीवी जी ने ब्लैंक नौइज नाम की एक संस्था के बारे में बताया था जो इस प्रकार लड़कियों को छेड़ने वालों के ख़िलाफ़ कुछ काम कर रही है | आप उनसे संपर्क स्थापित कर सकते हैं | आइये इस ब्लाग जगत के माध्यम से ही चेतना फैलाएं और जैसा भी सहयोग को सके करके इस सामाजिक बुराई का मुकाबला करें |

बड़ा अफ़सोस भी हुआ की पचास लोगों ने आपके लेख को पढ़ा और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी |

mehek said...

ye to wakayi sharamnak harkat hai,yu sareaam kisi ladki ko chedna bahut galat hai,kya waha koi nahi tha jo un ladkon ko pakad ke do chamat laga sake ya police mein de sake,ladki ke ansoon dekh hamdardi jatane se kuch nahi hota,magar,aapne atleast is wakiye ko samne to laya,varna roj na jane kitne kisse hotehai bus aur rasto par,neeraj ji se sehmat hun,agar itne logo ne isse padha to aawaz uthane ke liye tippani kaise nahi?

Tarun said...

वैसे क्या आपको लगता नही कि आप भी इस पोस्ट का टाईटिल कुछ अलग सा सोच सकते थे। मैं इसी टाईटिल का कहने के लिये आया था लेकिन घटना पढ़कर बढ़ा दुख और क्षोभ हुआ। वाकई में कितनी बेशर्मी की ये बात है, खुलेआम इस तरह की घटनायें अक्सर होती रहती है जाहिर सी बात है या तो इन आवारा लड़कों को पुलिस का समर्थन प्राप्त है या Law & Order की ऐसी तेसी में होने में ज्यादा दिन नही बचे हैं।

Anonymous said...

i read your post but i feel you are more wrong then them because you have given a title just to drive traffic to your blog . if a woman is raped then the whole sequence is repeated in the court like a film , using her body in graphic descriptions , what else are you doing . using womans body to drive traffic to your blog . and its not innocence on your part its your conivence because you understand that this way you can bring people to your blog
you trashed a good post with a bad title

सुशील कुमार छौक्कर said...

इस घटना कि जितनी निंदा की जाऐ उतनी कम है। पर इस टाईटल पर भी सोचना चाहिए।

mamta said...

बहुत ही शर्मनाक घटना है।
पर चूँकि उन लड़कों को किसी ने रोका नही इससे उनकी हिम्मत और भी बढ़ जायेगी ।

शायदा said...

सुनील जी अफ़सोस की बात उस हादसे से ज्‍़यादा आपका इस तरह से पोस्‍ट लिखना है। आपने एक उत्‍तेजक हैडिंग लगाकर लोगों का ध्‍यान खींचने की कोशिश की है, जो उतनी ही ग़लत है जितनी उन लड़कों की हरकत। हैरानी की बात ये भी है कि आप उस लड़की का हुस्‍न निहार रहे थे और बाद में उसके चेहरे पर पसीने की बूंद तक देख पाए लेकिन उठकर उन लोगों के पीछे नहीं दौड़ पाए जो ऐसा करके गए। बहुत हैरान हूं आपकी पोस्‍ट से।

सुजाता said...

सुनील ,
मैं वही बात कहने आयी थी जो पहले ही बहुत लोग आपको कह चुके हैं । आपकी पोस्ट का शीर्षक निहायत असम्वेदनशील है । आपकी पाक मंशाओं का कैसे यकीन किया जाए । पोस्ट हिट होना शायद आपका पहला कंसर्न है और स्त्री-सम्वेदनशीलता आखिरी ।
आगे यहाँ आने वालों को निराशा न हो इस लिए कृपया यह शीर्षक बदल लें ।

Ashok Pande said...

घटिया दुर्भाग्यपूर्ण घटना. उस से भी घटिया आप की पोस्ट का शीर्षक.

आज आप टॉप पर हैं. मज़ा आ रहा होगा. बात बताने के तरीके होते हैं श्रीमान.

राष्ट्रप्रेमी said...

मैं शायदा और सुजाता जी की बात से तो सहमत हूं, आगे कहना यह है कि उन लड्कों को आपने वह कारनामा करने दिया और उसे प्रचारित करके वाहवाही लूट रहे है, आपको शर्म नहीं आनी चाहिये? पुलिस हर जगह लोगों के साथ नही रह सकती जब तक हम स्वयं एक-दूसरे का सहयोग नही करते आप जैसे लोग ऐसे ही ब्लोग पर मजे लेते रहैंगे.

भुवनेश शर्मा said...

आपकी नीयत साफ दिखती है कि आप स्त्रियों की बात करने के बहाने अपने ब्‍लॉग पर हिट बढ़ाना चाहते हैं...

भाई जरूरत ही क्‍या है इसकी जब यही सब करना है.

रंजू ranju said...
This post has been removed by the author.
Rajesh Roshan said...

सुनील मैं इसे लिख रहा हु ना समझ में आए तो दो बार तीन बार पढियेगा

जब आप किसी के बारे में कह रहे होते हैं तो उस शख्स और इंसान से ज्यादा आप अपने बारे में बता रहे होते हैं की आप क्या हैं.....

Arun said...

bheed khinchne ka puraanaa tareeka!!
Yadi yah bheed khinchne ke liye nahin likha tha toh TITLE itna asabhya kyon hai ???

Anonymous said...

why do you want to comment with your name , lets resolve not to use our names on such blogs ..
these people are insenstive and this person has been writing against woman for long pretending to be showing himself a crusader for woman issues . he has no ethics of his own . he himself was glaring at the girl if we take his own words . he is trying to make himself pious and cool and trying to malign a woman
I THINK HE IS A HYPOCRITE a wolf in sheeps skin

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

ब्लॉग की दुनिया में किसी कोई बहुत गड़बड़ आ गयी है. संवेदनाओं को समझने के बजाये पाठक प्रशनचिंह लगाने में यदा व्यस्त नज़र आते हैं. मैंने एक लेख लिखा था. मैंने यह लेख इसलिए लिखा था क्योंकि में एक ऐसी घटना का ज़िक्र करना चाहता था जिसे मैंने देखा था, और यह एक समस्या थी, ऐसी समस्या जिससे हर दिन हजारों लड़कियों को जूझना पड़ता है.. लोगों से मैंने सलाह मांगी थी, एक रास्ता माँगा था.. लेकिन लोगों ने गलियां दी..

उन्होंने कहा कि टिप्पणी कि भीड़ जुटाने के लिए ऐसा शीर्षक दिया गया ..मैंने सोचा था कि ऐसा संवेदनशील शीर्षक कर समस्या को ज्यादा अच्छी तरह से व्यक्त किया जा सकेगा

और अगर 'ट्राफिक' जुटाने के लिए भी ऐसे हुआ होता तो भी गलत नहीं था... जब तक बुरे का वर्णन नहीं होगा उसका खत्म भी नहीं हो सकता.

लेख में लड़की के हुस्न कि तारीफ करने पर भी सवाल उठे... उसे मैं गलत नहीं मानता.. और हर कोई ऐसा करता है..जो नहीं करता वो संवेदनहीन है..

मैं शीर्षक नहीं बदलूँगा.. अगर किसी को मेरी मुहिम में साथ देना हो तो दे.. वर्ना मैंने अकेले कारवां बनाने वालों को भी देखा है..

Anonymous said...

बिल्कुल सही शीर्षक है दोस्त। आपको नेक सलाह है कि आप पत्रकारिता छोड मस्तराम की तरह लिखे। सच कह रहा हूँ रातोरात बेस्ट राइटर बन जायेंगे। आगाज तो इस पोस्ट से हो ही गया है।

nav pravah said...

जालिम जी,नमस्कार.मैं ब्लॉग्गिंग के क्षेत्र में अभी बच्चा हूँ,हो सकता है अन्य लोगों के मुकाबले मेरी समझ थोडी कच्ची हो,लाजिमी भी है.कोई नियम कानून टूट जाए तो क्षमा प्रार्थी हूँ.
मैंने आपका लेख पढ़ा.वाह जी,बहुत खूब लिखते हैं,जितना बड़ा आपका लेख उसके कई गुने बड़े कमेन्ट.बहुत खूब,बधाई स्वीकार करें.
मैंने बहुत कम हिन्दी साहित्य पढ़ा है,विज्ञानं का स्नातक हूँ,माफ़ी चाहूँगा,नायिकाओं के यौवन का वर्णन तो तमाम कवितों में पढ़ा पार गद्दी में पहलीबार पढ़ा.मन हर्षित हुआ.आख़िर,हम नई पीढी के साहित्यकार/लेखक ठहरे.
रही बात किसी लड़की/बालिका के साथ ऐसे दुर्व्यवहार की तो इसमें इतना हो हल्ला क्यों मचा है,मुझे अब तक नही समझ आया.ऐसा तो रोजाना ही होता है.अब भला आप ही बतायी भला कलम चलने वाले हाँथ किसी के साथ छेड़छाड़ का प्रतिरोड़ कैसे कर सकते हैं?हद है भाई,हम शरीफ लोग हैं,हमें किसी पंगे में फंसना गंवारा नहीं.
भाई जी,एक बात और है,मैंने लोगों के कमेन्ट पढ़े,आप बिल्कुल भी मत घबराईयेगा,ये सब के सब रुधिग्रस्त मानसिकता के प्रबल वाहक हैं.वैसे भी हर काल में बुराई के प्रति आवाज उठाने वालों को यह सब सहना पड़ा है.आप चिंतित न हों,लोग जितना आलोचना करेंगे,आपका कद उतना ही उठेगा.अब आख़िर दो दो काम कैसे सम्भव है की हम आवाज भी उठाएं और मदद भी करें.लोगों में सहकारिता की भावना तो बिल्कुल लादे हुए ज़माने की बात हो गई है.अरे भाई,लोगों को कम का बंटवारा कर लेना चाहिए.कुछ लोग हल्ला मचाएंगे,कुछ लोग सहायता करेंगे.
आखिरी बात ये की यदि हम प्रसिद्द होने के लिए मीडिया का थोड़ा फायदा उतरहा भी लें तो क्या हर्जा?हरकल में ऐसा हुआ है,लोगो ने इतिहास नहीं पढ़ा न,सीधे आपका लेख ही पढ़ लिए.
रही बात शीर्षक की तो इसका मतलब ही होता है आकर्षक होना,यदि किसी बालिका का चेहरा ही आकर्षक नहीं होगा तो भला हम उसे क्योंकर निहारेंगे.आपने भी निहारा बालिका को तो सी लिए न की उसका शीर्षक अच्छा था.
आप बिल्कुल निश्चिंत रहे.लोग भी जाने कहाँ कहाँ से पकड़ कर चले आते हैं.
शुभकामनाओं समेत,
आपका
आलोक सिंह "साहिल"

Anonymous said...

aalok sahil ka kament naa samjh aayaa ho to matlab mae bataa daetee hun tum ek bastard ho aur rah gayee baat tumharii muhim kii to gulabi gang kaafi haen in sab baato kae liyae aur agar kal tak yae shirsjak nahin badla to is post ko mae woman cell mae bhejugii aur google abuse mae bhi bhejugii
naam kyaa dena apna yahaan , jis din tumhara yae blog delete ho jaayaga tumko naam kaa ehsaas kudh ho jayegaa
shirshak hii nahin is post ko bhi turant delete karo dhamki nahin haen yae maene aur kafii aur mahilaa nae is blog ko flag kar hii diyaa haen aur baaki

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

मन व्यथित है, घबराहट भी है, और धमकियों से डर भी, अनाम टिप्पणियों से खतरा भी, लेकिन सत्य पथ पर चलने का होंसला अभी बाकि है और तब तक रहेगा जब तक ईमान रहेगा

इस घटना को ब्लॉग पर देने के पीछे मेरा मकसद केवल एक समस्या को ज़ाहिर करना था.. हाँ ब्लॉग फ्लैग करने से मुझे सर नहीं लगता.. रही बात महिला सेल मैं भेजने की तो भेजिए..
सत्यमेव जयते

राजीव रंजन प्रसाद said...

सुनील जी,


विषय पर विवाद व्यर्थ है मूल बात है कि हम कहाँ जा रहे हैं? आपके आलेख नें एक आक्रोश पैदा किया, उस कृत्य की भर्त्सना हुई यह आपके प्रयास की सार्थकता ही है।

आपका दोष केवल इतना ही है कि आपके एक निंदनीय और भर्तसनायोग्य घटना को कपडे पहना कर प्रस्तुत नहीं किया..किंतु समाज जिस दिशा में जा रहा है वह भयावह तस्वीर जरूर दीख पडती है।


***राजीव रंजन प्रसाद

राज भाटिय़ा said...

सुनील जी आप घबराये नही यह अनामी सुनमी की धमकी मे मत आये,ओर डटे रहे मे हू आप के साथ,अगर इन्हे नारी की इतनी ही फ़िक्र हे तो पहले महिला उन् मजदुर महिला की मदद करे जो छोटे बच्चो को भागवान के सहारे छोड कर, उन्ही का पेट भरने के लिये सारा दिन काम करती हे, उन भिखारनो का उदधार करे जो सडको पर, लाल बत्तियो पर, चोराहो पर भीख मागं रही हे, ओर बोलो इन अनामी कुनामी टिपण्णी वालो ओर वालियो से कर लो जो करना हे, जब आप ने कुछ गलत नही किया तो डर केसा... भाई जीयो ओर जीने दो, मे जब गलती करता हु तो माफ़ी मागं ने का भी हक रखता हु, अगर सच्चा हु तो डर काहे गा, काहे कि माफ़ी,
अगर यही बात प्यार से कही जाती जेसे नीरज जी ने, महक जी ने,तरुन जी ने,सुनील ओर ममता जी ने ओर बाकी सब ने कहा हे,तो शायद मे भी कहता लेकिन जब धमकी ओर दादा गिरी की बात आये तो भाई मे खडा हु आप के साथ,

राज भाटिय़ा said...

samjh aayaa ho to matlab mae bataa daetee hun tum ek bastard
सुनील जी इन लाईनो को धयान से पढे, यह किसी लडकी की टिपाण्णी हे, ओर जो नाम छुपा कर टिपाण्णी करते हे वही ऊपर लिखी लाइन के आखरी अक्ष्रर के भी हक दार हे,क्योकि जिन्हे अपने वाप का नाम ही नही मालुम वही अपने नाम को छुपाते हे.
ओर सच्चाई के साथ मे खडा हु, जो चाहे हो जाये

अविनाश वाचस्पति said...

यह कैसी मित्रता है
इससे बड़ी नहीं शत्रुता है

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