टीवी पर चर्चा हो रही थी. एक लड़की का बलात्कार हो गया था. एक महोदय बोले लड़कियों को कम फैशन करना चाहिए...
लेकिन क्यों.....
कई प्रशन उठते हैं.. सबसे पहला की क्या कम फैशन करने से ऐसे अपराध नहीं होंगे ?इससे भी खतरनाक प्रशन यह है कि ऐसे अपराध करने वाले लोग भेडिये हैं... जो लड़कियों को देखते ही आप खो देते हैं.. अगर सचमुच ऐसा है तो पर्दा करने कि जरूरत किसे है.. ऐसे संदिग्ध लोगों की आखों पर पट्टियाँ बांध देनी चाहिए.. पर्दे की जरूरत उन लोगों को है न की मासूम लड़कियों को..
दूसरी बात क्या सचमुच फैसहं ही जिम्मेदार है ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए. तो क्या कारण है की दूध पीती बच्चियों के बलात्कार हो जाते हैं.. क्यों मानसिक रूप से विक्षिप्त लड़कियों पर कहर टूटता है..
यह कैसी सोच है की फैशन पर रोक लगा दो... रोक तो उन लोगों पर लगनी चाहिए जो ऐसे भयानक बयान देते हैं.. सोच बदलनी होगी ऐसी लोगों की.. अगर नहीं तो ऐसी सोच रखने वालों को ही बदल देना होगा..
फैशन पतित नहीं पवित्र है
12 comments:
sunil keep the good work going its important that man highlight such issues then we woman who write such things will not feel so isolated
आप सही कह रहे हैं ऐसी ब्यानबाजी करने वालों को ही बैन कर देना चाहिए।
यदि अपना दिमाग स्वस्थ हो दिल में शेतान न बैठा हो तो कपड़े या फैशन इस प्रकार की घटनाओं को जन्म देने का मूल कारण नही है ..मूल कारण है अपनी सोच और नारी को सिर्फ़ एक वस्तु समझ लेना जिस पर वह अपना अधिकार या जबरन बल दिखा कर शायद पुरूष होने का दंभ भरता है ...यदि यह नही है तो आपने सही लिखा की क्यों दूध पीती बच्चियां शिकार बनती हैं ..क्यों अपने ही घर में रहने वाला रिश्तेदार सब शर्म ताक पर रख कर यह काम करता है ..मुझे ऐसे लोग बीमार मानसिकता के लगते हैं ..जो यह सब करते हुए के एक बार भी हिचकचाते नही
क्या फैशन पतित या पवित्र होता है? मेरे विचार में देखने वाली आँख और उसके बाद की प्रतिक्रिया पतित या पवित्र होती है. हाँ यह बात जरूर है कि फैशन से पौशाक की शालीनता नष्ट नहीं होनी चाहिए.
आप नारी की समानता की आवाज उठा रहीं हैं. बहुत अच्छी बात है. पर समानता किस से और क्यों?
आपकी बात से सहमत हूँ।
घुघूती बासूती
बिल्कुल सही कह रहे हैं, पूर्ण सहमत हूँ आपसे.
@Suresh Chandra Gupta जी,
फैशन पवित्र होता है. इसमें मुझे कोई शंका नहीं है.. इस प्रश्न का व्यापक उत्तर आपको www.skdogra2.blogspot.com पर मिलेगा कृपया जरूर देखें...
आगे अपने लिखा है.... "आप नारी की समानता की आवाज उठा रहीं हैं. बहुत अच्छी बात है. पर समानता किस से और क्यों?"
सबसे पहले यह बता दूं की मैं महिला नहीं हूँ, पुरुष हूँ अतः मेरे लिए 'रही हैं' का संबोधन उचित नहीं है... जहाँ तक समानता किससे का प्रश्न है तो इसका मेरे पास यही उत्तर है, "एक मनुष्य की दूसरे मनुष्य से समानता" और क्यों का जवाब अप अपने आप से पूछेंगे तो शायद आपको बेहतर उत्तर मिलेगा..
शेष सभी को बहुत बहुत धन्यवाद.
aapka kaam kabil-e-tarif hai.aap bdhayi ke patra hain..bdhayi swikaren...
kripya ye word verificaton hta den..hindi bloging me spam jaisi koi samsya abhi nhi hai
प्रश्न है कि आख़िर महिला कब तक प्रताड़ना व अत्याचार को सहती रहेगी? महिलाओं को अपने ऊपर हो रहे अत्याचार के विरोध में आगे आना होगा .........
महिलाओं को चुपचाप सबकुछ सहते रहना प्रताड़ना को बढावा देना है
http://popularindia.blogspot.com/2007/10/blog-post_22.ह्त्म्ल
बन्धु! अपन आलसी हैं किन्तु आपने ऐसा मुद्दा उठाया कि मैं रुक नहीं पाया. आपकी बात को आगे बढाया है मैंने अपने ब्लाग पर. मेरे दिमाग में लगी जंग हटाने के लिए शुक्रिया और शुक्रिया ऐसे मुद्दे उठाने के लिए.
सुनील जी, मैं आपकी बात से सहमत हूं लेकिन सिर्फ़ एक बात को छोडकर "फैशन पतित नहीं पवित्र है"
फ़ैशन पवित्र तब तक है जब तक शालीनता की हद मे है वरना फ़िर वो नग्नता मे तब्दील हो जाता है।
Post a Comment